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जल्दी करो मेरे छेद से ही डाल लो न...भाग 2

रानी की आवाज उसके चिकने गलों जैसी ही मीठी थी..आशीष ने एक बार फिर कृष्णा की चूचियों को अन्दर तक देखा... उसके लड में तनाव आने लगा...और शायद वो तनाव रानी अपनी गांड की दरार में महसूस करने लगी...रानी बार-बार अपनी गांड को लंड की सीधी टक्कर से बचने के लिए इधर-उधर मटकाने लगी...उसका ऐसा करना उसकी ही गोल मटोल गांड के लिए नुक्सान देह साबित होने लगा...लंड गांड से सहलाया जाता हुआ और अधिक सख्त होने लगा...और अधिक खड़ा होने लगा...पर रानी के पास ज्यादा विकल्प नहीं थे...वो दाई गोलाई को बचाती तो लड बायीं पर ठोकर मारता...और अगर बायीं को बचाती तो दाई पर उसको लंड चुभता हुआ महसूस होता...उसको एक ही तरीका अच्छा लगा...वो सीधी खड़ी हो गयी...पर इससे उसकी मुसीबत और भयंकर हो गयी...बिलकुल खड़ा होकर लंड उसकी गांड की दरारों के बीचों बीच फंस गया...वो शर्मा कर इधर-उधर देखने लगी...पर कुछ नहीं बोली...आशीष ने मन ही मन एक योजना बना ली...अब वो इनके साथ ज्यादा से ज्यादा रहना चाहता था..."मैं आपके बापू से बात करू;मेरे पास आरक्षण के चार टिकट हैं...मेरे और दोस्त भी आने वाले थे पर वो आ नहीं पाए!मैं भी जयपुर से उसी में जाऊँगा कल रात को करीब 10 बजे वो जयपुर पहुंचेगी...तुम चाहो तो आगे का मुझे साधारण किराया दे देना!"आशीष को डर था कि किराया न मांगने पर कहीं वो और कुछ न समझ बैठे...लम्बा हो होकर!...उसका लंड रानी कि गांड में घुसपैठ करता ही जा रहा था..."बापू!"जरा इधर कू आना!कृष्णा ने जैसे गुस्से में आवाज लगायी..."अरे मुश्किल से तो यहाँ दोनों पैर टिकाये हैं!अब इस जगह को भी खो दूं क्या?"बुद्धे ने सर निकाल कर कहा...रानी ने हाथ से पकड़ कर अन्दर फंसे लंड को बहार निकलने की कोशिश की पर उसके मुलायम हाथों के स्पर्श से ही लंड फुफकारा...कसमसा कर रानी ने अपना हाथ वापस खींच लिया...अब उसकी हालत खराब होने लगी थी...आशीष को लग रहा था जैसे रानी लंड पर टंगी हुयी है...उसने अपनी एडियों को ऊँचा उठा लिया ताकि उसके कहर से बच सके पर लंड को तो ऊपर ही उठाना था...आशीष की तबियत खुश हो गयी...!रानी आगे होने की भी कोशिश कर रही थी पर आगे तो दोनों की चूचियां पहले ही एक दुसरे से टकरा कर मसली जा रही थी...बेचारी रानी एड़ियों पर कब तक खड़ी रहती;वो जैसे ही नीचे हुयी, लंड और आगे बढ़कर उसकी चूत की चुम्मी लेने लगा...रानी की सिसकी निकाल गयी...,"आःह्ह!""क्या हुआ रानी?"कृष्णा ने उसको देखकर पूछा..."कुछ नहीं भाभी!"तुम बापू से कहो न भैया से आरक्षण वाला टिकट लेने के लिए!"आशीष को भैया कहना अच्छा नहीं लगा... आखिर भैया ऐसे गांड में लंड थोडा ही फंसाते हैं...धीरे-धीरे रानी का बदन भी बहकने सा लगा...आशीष का लंड अब ठीक उसकी चूत के दाने पर टिका हुआ था..."बापू"कृष्णा चिल्लाई..."बापू" ने अपना मुंह इस तरफ निकला, इस तरह खड़े होने के लिए आशीष को घूरा, और फिर भीड देखकर समझ गया की आशीष तो उनको उल्टा बचा ही रहा है," क्या है बेटी?"कृष्णा ने घूंघट निकल लिया था,"इनके पास जयपुर से आगे के लिए आरक्षण की टिकट हैं;इनके काम की नहीं हैं...कह रहे हैं सामान्य किराया लेकर दे देंगे!"उसके बापू ने आशीष को ऊपर से नीचे तक देखा;संतुस्ट होकर बोला,"हम गरीबों पर ये बड़ा उपकार होगा...किराया सामान्य का ही लोगे न!"आशीष ने खुश होकर कहा," ताऊजी मेरे किस काम की हैं...मुझे तो जो मिल जायेगा...फायदे का ही होगा..."कहते हुए वो दुआ कर रहा था की ताऊ को पता न हो की टिकट वापस भी हो जाती हैं..."ठीक है भैया...जयपुर उतर जायेंगे...बड़ी मेहरबानी!"कहकर भीड़ में उसका मुंह गायब हो गया...आशीष का ध्यान रानी पर गया वो धीरे-धीरे आगे पीछे हो रही थी...उसको मजा आ रहा था...कुछ देर ऐसे ही होते रहने के बाद उसकी आँखें बंद हो गयी...
और उसने कृष्णा को जोर से पकड़ लिया..."क्या हुआ रानी?"...सँभलते हुए वह बोली..."कुछ नहीं भाभी चक्कर सा आ गया था...अब तक आशीष समझ चूका था कि रानी चुदाई के मुफ्त में ही मजे ले गयी...उसका तो अब भी ऐसे ही खड़ा था...एक बार आशीष के मन में आई कि टोइलेट में जाकर मुठ मार आये...पर उसके बाद ये ख़ास जगह खोने का डर था... अचानक किसी ने लाइट के आगे कुछ लटका दिया जिससे आसपास अँधेरा सा हो गया...रानी कि गांड में लंड वैसे ही अकड़ा खड़ा था;जैसे कह रहा हो...अन्दर घुसे बिना नहीं मानूंगा मेरी रानी!लंड के धक्को और अपनी चूचियों के कृष्णा भाभी की चूचियों से रगड़ खाते-खाते वो जल्दी ही फिर लाल हो गयी...इस बार आशीष से रहा नही गया...कुछ तो रौशनी कम होने का फायदा...कुछ ये विश्वास की रानी मजे ले रही है... उसने थोडा सा पीछे हटकर अपने पेन्ट की जिप खोल कर रानी की गांड की घटी में खुला चरने के लिए अपने घोड़े को खुला छोड़ दिया...रानी को इस बार ज्यादा गर्मी का अहसास हुआ...उसने अपने नीचे हाथ लगा कर देखा की नीचे से कहीं गीली तो नहीं हो गयी;और जब मोटे लंड की मुंड पर हाथ लगा तो वो उचक गयी...अपना हाथ हटा लिया...और एक बार पीछे देखा...आशीष ने महसूस किया,उसकी आँखों में गुस्सा नहीं था...भाभी का और दूसरी सवारियों के देख लेने का थोडा डर जरुर था...थोड़ी देर बाद उसने धीरे-2 करके अपना कमीज पीछे से निकल दिया...अब लंड और चूत के बीच में दो दीवारें थी...एक तो उसकी सलवार और दूसरा उसकी कच्छी...आशीष ने हिम्मत करके उसकी गांड में अपनी उंगली डाल दी

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