अपनी शान में मर्दों के लंड खड़े करवाने के कुछ नुस्खे

* All pictures in this article taken from the internet. Credit goes to the original posters.
प्रत्येक स्त्री चाहती है कि वह सुन्दर दिखे , हर ओर उसके रूप-यौवन की चर्चा हो , पुरुष उसे ललचाई नज़रों से देखें और अन्य महिलाएं ईर्ष्या से ...इसके लिए वह सौंदर्य प्रसाधनों पर तो बहुत पैसा खर्च करती है परन्तु यह जानते हुए भी कि उसका असली आकर्षण उसकी देह है वह उसका प्रदर्शन करने में हिचकिचाती है
इसका प्रमुख कारण है कि हमारे समाज में कामुकता को अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता .. चारों ओर व्याप्त भ्रष्टाचार , मानसिक और आर्थिक शोषण को तो हमने जीवन का अंग मान लिया है पर किसी ने सेक्स की इच्छा जताई नहीं कि उसके चरित्र पर उँगलियाँ उठने लगती हैं ... जबकि हकीकत यह है कि यौनेच्छा एक नैसर्गिक भावना है ... उसे प्रकट करने में संकोच क्यों ? ...महिलाओं के सामने प्रश्न यह रहता है कि किस प्रकार मन की इच्छा भी पूरी हो जाये और इस पाखण्डी समाज में भी उनका सम्मान बना रहे
इसका दूसरा कारण है अपनी शारीरिक सुन्दरता को लेकर आत्मविश्वास की कमी ... आत्मविश्वास बढ़े भी तो कैसे ? ... महिलाओं के पास ना तो पुरुष की नज़र होती है और ना ही 'लंड' ... मर्द का लंड किसी स्त्री के यौनाकर्षण को मापने का सबसे सटीक यन्त्र है ...'माल' दिखते ही साला टन्न खड़ा हो जाता है .... आश्चर्य की बात है कि जिन पुरुषों को महिलायों के समक्ष अभद्र भाषा का प्रयोग करने में ज़रा भी संकोच नहीं होता वे भी उनके शरीर की प्रशंसा करते हुए हकलाने लगते हैं...और अगर कभी करें भी तो वह तारीफ़ कम चापलूसी ज्यादा लगती है...अतः उन्हें अपनी उन सहेलियों की राय पर निर्भर रहना पड़ता है जो खुद नारी होने की वजह से इस बारे में सिर्फ अंदाज़ा ही लगा सकती हैं...रही सही कसर टीवी और फिल्में पूरा कर देती हैं जो डेढ़-पसली की स्त्रियों को सेक्सी कहकर पेश करती हैं ... उन्हें देखकर तो ऐसा लगता है मानो किसी अकाल पीड़ित क्षेत्र से आ रही हों ... दुर्भाग्यवश आजकल नवयुवतियां उन्हें ही अपना आदर्श मान बैठती हैं
एक भारतीय पुरूष होने के नाते मैं यह कह सकता हूँ कि हमें नारी का भरा-पूरा शरीर ही आकर्षित करता है .इसलिए अगर आपको लगता है कि आपकी कमर का वो बल या आपकी मोटी जांघें और भारी नितम्ब कोई खामी हैं तो आप ग़लत सोचती हैं .वही तो हम देखना चाहते हैं ... अगर पुरुषों जैसा कसरती बदन ही देखना हो तो दर्पण के सामने नंगे खड़े होकर खुद को ना देखें ?
एक स्वस्थ शरीर ही सुंदर शरीर है, इसलिए अपने स्वास्थ्य की अच्छी देखभाल कीजिये... जहाँ तक हो सके मैदे से बनी वस्तुओं और शीतल पेय के सेवन से बचिए ..पौष्टिक आहार , व्यायाम , नियमित दिनचर्या से आपका शरीर सुडौल बनेगा... अगर आप स्वस्थ रहेंगी तो आपका मन भी चुदवाने को करेगा और आपके साथी को भी आपको चोदने में मज़ा आएगा ....इतना कि वह आपका दिवाना बन जायेगा.
यहाँ यह बताना ज़रूरी है कि सिर्फ़ सुंदर शरीर ही आपको सेक्सी नहीं बनाता....शारीरिक स्वच्छता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है ...इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखिये कि आपके मुँह से दुर्गन्ध ना आती हो ...आपके कान और नाखून साफ़ हों
वैसे तो महिलाएं स्वभाव से ही चंचल होती हैं ... उन्हें यह सिखाने की ज़रुरत नहीं पड़ती कि पुरुषों को कैसे उकसाया जाता है किन्तु छेड़-छाड़ के कुछ शारीरिक पहलू ऐसे हैं जिन्हें नारी होने के कारण उनके लिए समझ पाना थोड़ा मुश्किल है ... क्यों ? ... कहा ना... उनके पास ज़रा-ज़रा सी बात पर तन जाने वाला लोड़ा नहीं होता
इसलिए नारी सौंदर्य और यौनाकर्षण के बारे में उनकी धारणा पत्रिकाएं और फिल्में देखकर ही बनती हैं ... किन्तु आजकल की फिल्मों में नारी को जिस अंदाज़ में पेश किया जाता है उसे देखकर उत्तेजना कम रोना अधिक आता है ... हास्यास्पद वेशभूषा और चेहरे पर एक जैसे भाव ... मानो एक ही फैक्ट्री से बनकर आ रही हों ...अब उन्हें कौन समझाए कि महज छोटे-छोटे कपड़े पहनने से कोई सेक्सी नहीं बन जाता ... बल्कि मेरा तो यह मानना है कि छोटे कपड़े आपके जिस्म की खूबसूरती से ज्यादा उसकी कमियों को उजागर करते हैं ... अंग-प्रदर्शन तो ऐसा होना चाहिए कि आपके तन की एक झलक पाकर ही पुरुष वासना की दलदल में फंसकर दिन रात बस आपको नंगा करने के ही ख़्वाब देखने लगे ... अगर पहले ही सब कुछ दिखा दिया तो फिर बचा क्या ? ... एक दौर वह था जब अभिनेत्रियाँ सिर्फ अपना आँचल ढलकाती थीं तो लंड पैंट फाड़कर बाहर आ जाया करता था
इस लेख में मैंने यौनाकर्षण (sex appeal) के विषय में नारी मन की कुछ भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया है
* All pictures in this article taken from the internet. Credit goes to the original posters.
प्रत्येक स्त्री चाहती है कि वह सुन्दर दिखे , हर ओर उसके रूप-यौवन की चर्चा हो , पुरुष उसे ललचाई नज़रों से देखें और अन्य महिलाएं ईर्ष्या से ...इसके लिए वह सौंदर्य प्रसाधनों पर तो बहुत पैसा खर्च करती है परन्तु यह जानते हुए भी कि उसका असली आकर्षण उसकी देह है वह उसका प्रदर्शन करने में हिचकिचाती है
इसका प्रमुख कारण है कि हमारे समाज में कामुकता को अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता .. चारों ओर व्याप्त भ्रष्टाचार , मानसिक और आर्थिक शोषण को तो हमने जीवन का अंग मान लिया है पर किसी ने सेक्स की इच्छा जताई नहीं कि उसके चरित्र पर उँगलियाँ उठने लगती हैं ... जबकि हकीकत यह है कि यौनेच्छा एक नैसर्गिक भावना है ... उसे प्रकट करने में संकोच क्यों ? ...महिलाओं के सामने प्रश्न यह रहता है कि किस प्रकार मन की इच्छा भी पूरी हो जाये और इस पाखण्डी समाज में भी उनका सम्मान बना रहे
इसका दूसरा कारण है अपनी शारीरिक सुन्दरता को लेकर आत्मविश्वास की कमी ... आत्मविश्वास बढ़े भी तो कैसे ? ... महिलाओं के पास ना तो पुरुष की नज़र होती है और ना ही 'लंड' ... मर्द का लंड किसी स्त्री के यौनाकर्षण को मापने का सबसे सटीक यन्त्र है ...'माल' दिखते ही साला टन्न खड़ा हो जाता है .... आश्चर्य की बात है कि जिन पुरुषों को महिलायों के समक्ष अभद्र भाषा का प्रयोग करने में ज़रा भी संकोच नहीं होता वे भी उनके शरीर की प्रशंसा करते हुए हकलाने लगते हैं...और अगर कभी करें भी तो वह तारीफ़ कम चापलूसी ज्यादा लगती है...अतः उन्हें अपनी उन सहेलियों की राय पर निर्भर रहना पड़ता है जो खुद नारी होने की वजह से इस बारे में सिर्फ अंदाज़ा ही लगा सकती हैं...रही सही कसर टीवी और फिल्में पूरा कर देती हैं जो डेढ़-पसली की स्त्रियों को सेक्सी कहकर पेश करती हैं ... उन्हें देखकर तो ऐसा लगता है मानो किसी अकाल पीड़ित क्षेत्र से आ रही हों ... दुर्भाग्यवश आजकल नवयुवतियां उन्हें ही अपना आदर्श मान बैठती हैं
एक भारतीय पुरूष होने के नाते मैं यह कह सकता हूँ कि हमें नारी का भरा-पूरा शरीर ही आकर्षित करता है .इसलिए अगर आपको लगता है कि आपकी कमर का वो बल या आपकी मोटी जांघें और भारी नितम्ब कोई खामी हैं तो आप ग़लत सोचती हैं .वही तो हम देखना चाहते हैं ... अगर पुरुषों जैसा कसरती बदन ही देखना हो तो दर्पण के सामने नंगे खड़े होकर खुद को ना देखें ?
एक स्वस्थ शरीर ही सुंदर शरीर है, इसलिए अपने स्वास्थ्य की अच्छी देखभाल कीजिये... जहाँ तक हो सके मैदे से बनी वस्तुओं और शीतल पेय के सेवन से बचिए ..पौष्टिक आहार , व्यायाम , नियमित दिनचर्या से आपका शरीर सुडौल बनेगा... अगर आप स्वस्थ रहेंगी तो आपका मन भी चुदवाने को करेगा और आपके साथी को भी आपको चोदने में मज़ा आएगा ....इतना कि वह आपका दिवाना बन जायेगा.
यहाँ यह बताना ज़रूरी है कि सिर्फ़ सुंदर शरीर ही आपको सेक्सी नहीं बनाता....शारीरिक स्वच्छता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है ...इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखिये कि आपके मुँह से दुर्गन्ध ना आती हो ...आपके कान और नाखून साफ़ हों
वैसे तो महिलाएं स्वभाव से ही चंचल होती हैं ... उन्हें यह सिखाने की ज़रुरत नहीं पड़ती कि पुरुषों को कैसे उकसाया जाता है किन्तु छेड़-छाड़ के कुछ शारीरिक पहलू ऐसे हैं जिन्हें नारी होने के कारण उनके लिए समझ पाना थोड़ा मुश्किल है ... क्यों ? ... कहा ना... उनके पास ज़रा-ज़रा सी बात पर तन जाने वाला लोड़ा नहीं होता
इसलिए नारी सौंदर्य और यौनाकर्षण के बारे में उनकी धारणा पत्रिकाएं और फिल्में देखकर ही बनती हैं ... किन्तु आजकल की फिल्मों में नारी को जिस अंदाज़ में पेश किया जाता है उसे देखकर उत्तेजना कम रोना अधिक आता है ... हास्यास्पद वेशभूषा और चेहरे पर एक जैसे भाव ... मानो एक ही फैक्ट्री से बनकर आ रही हों ...अब उन्हें कौन समझाए कि महज छोटे-छोटे कपड़े पहनने से कोई सेक्सी नहीं बन जाता ... बल्कि मेरा तो यह मानना है कि छोटे कपड़े आपके जिस्म की खूबसूरती से ज्यादा उसकी कमियों को उजागर करते हैं ... अंग-प्रदर्शन तो ऐसा होना चाहिए कि आपके तन की एक झलक पाकर ही पुरुष वासना की दलदल में फंसकर दिन रात बस आपको नंगा करने के ही ख़्वाब देखने लगे ... अगर पहले ही सब कुछ दिखा दिया तो फिर बचा क्या ? ... एक दौर वह था जब अभिनेत्रियाँ सिर्फ अपना आँचल ढलकाती थीं तो लंड पैंट फाड़कर बाहर आ जाया करता था
इस लेख में मैंने यौनाकर्षण (sex appeal) के विषय में नारी मन की कुछ भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया है
जो महिलाएं अंग-प्रदर्शन की कला में माहिर होना चाहती हैं उनके लिए कुछ सुझाव पेश कर रहा हूँ -
अंग-प्रदर्शन एक दुधारी तलवार है ... जहाँ एक ओर यह आपके तन की खूबसूरती को उभारकर आपको पुरुषों की नज़रों में चढ़ाता है वहीं अपनी कमजोरियों को ध्यान में न रखकर किया गया प्रदर्शन आपको हँसी का पात्र भी बना सकता है ... इसलिए अपना जिस्म दिखाने से पहले उसकी खूबियों को अच्छी तरह जान लें
अगर आपकी बाहें और टांगें पतली हैं तो भूल कर भी छोटे तंग कपड़े मत पहनिए ... अंग-प्रदर्शन करने की सोचने से पहले अपना वज़न बढ़ाइये ... तब तक सही माप के कपड़े पहनिए ... ना ज्यादा तंग और ना ज्यादा ढीले
(a) बाहें -
ना जाने आपको यह मालूम भी है या नहीं ... आपकी चिकनी बाहें,कलाइयाँ और लम्बी उँगलियाँ देखकर हमारे दिल की धड़कन बढ़ जाती है ... और बगलों की तो पूछिए मत ... मिले तो चाट जाऊँ ... उसे दिखाने का एक तरीका यह है कि स्लीवलेस ड्रेस पहनकर बीच-बीच में अपने हाथों से अपने बाल सँवारिये ... इससे सामने बैठे पुरुष को आपकी बगल की झलक मिलती रहेगी ... बगल की त्वचा चूत की त्वचा के समान ही प्रतीत होती है जिसके दर्शन होते ही उसकी पैंट में खलबली मच जायेगी .

(b) टांगें -
हर पुरूष आपके पैरों के अंगूठों को चूसने ... आपकी चिकनी सुडौल पिंडलियों और मांसल जाँघों को चूमने का ख्वाब देखता है ... पेडिक्योर किये हुए पैर और लाल नेल-पौलिश लगे नाखून देखकर हम अपनी सुध-बुध खो बैठते हैं
चिकनी-चुपड़ी टाँगे...कोई इन्हें चाटे बगैर कैसे रह सकता है...

क्या आप जानती हैं कि अपनी टांगों की नुमाइश कैसे की जाती है ? ऐसी ड्रेस पहनें जो आपके बैठने पर घुटनों से ज़रा ऊपर तक उठ जाए ... जैसे कि केप्री या मिडी . फिर कुर्सी पर एक टांग पर दूसरी टांग चढ़ाकर इस प्रकार बैठिये कि आपकी आगे वाली पिंडली पर पिछले पैर का दबाव पड़े

...अगर आप फर्श पर हों तो इस तरह बैठें कि सामने बैठा पुरूष आपके घुटने और जाँघों से सटी पिंडलियाँ साफ़ देख सके .... उस वक्त पिंडलियों को चबा जाने का मन करता है

उसे ललचाने के लिए कुछ ऐसा पहनिए जो आपकी जाँघों से चिपक जाए ... जैसे कोई प्लेन सलवार .. फिर पहले की ही भांति टांग पर टांग चढ़ाकर बैठिये...कुर्ते के साइड स्लिट में से सलवार में लिपटी आपकी जाँघों की झलक उसे पागल कर देगी

अगर आप थोड़ी और बेशर्म हो सकती हैं तो छोटी स्कर्ट पहनकर टांग पर टांग चढ़ाकर इस प्रकार बैठिये जिससे उसे आपकी जाँघ के बाहरी मांसल भाग का नज़ारा मिल सके ...ठीक उस तरह जैसे फ़िल्म अवार्ड समारोह में अभिनेत्रियाँ बैठती हैं ...पर जैसा मैंने पहले कहा ,अंग-प्रदर्शन तब अधिक प्रभावी होता है जब वह मर्द को और अधिक देखने के लिए बेकरार करे न कि पहले ही सब कुछ दिखा दे

टांगों का पिछला भाग तो बेहद कामोत्तेजक होता है. घुटनों तक की स्कर्ट पहनकर ,नल से पानी पीने या अपने शूलेस बांधने के बहाने ,कमर से झुक जाइए .आपकी सुडौल पिंडलियों और जाँघों के पिछले भाग को देखकर पीछे खड़े युवक का कुछ और भी खड़ा हो जायेगा ...ऐसी सुडौल टांगों को तो नोच कर खा जाने की इच्छा होती है ....पर ध्यान रहे कि कहीं वह चुपके से आकर आपकी स्कर्ट पूरी ऊपर ना उठा दे
अगली बार जब स्कर्ट पहनकर आप सीढ़ियाँ चढ़ें तो पीछे मुड़कर न देखें ..बहुत से युवक आपकी पैंटी का रंग जानने के लिए उत्सुक हैं ...उन्हें भी तो कुछ मज़ा लेने दीजिये ... नीचे से आपकी चिकनी गोरी टांगें संगमरमर के स्तंभों सी प्रतीत होती हैं

शर्मीले स्वभाव की महिलाओं को यह जाल बिछाना चाहिए ...ऐसे कमरे में लेटकर सोने का नाटक कीजिये जहाँ पुरुष का आना-जाना हो ...अपने कपड़ों को अस्त-व्यस्त होने दें ... घुटनों तक उठी साड़ी ,ऊपरी हुक खुला ब्लाउज ....संभावनाएं बहुत हैं ... कोई आश्चर्य की बात नहीं अगर वह दबे पाँव आकर आपको चूम भी ले ... आखिर सुप्त-सौंदर्य को निहारने का मौका रोज़-रोज़ थोड़े ही मिलता है
...सोने का तो सिर्फ बहाना है ... इन्हें तो हमारा लंड खड़ा करवाना है ...

अंग-प्रदर्शन एक दुधारी तलवार है ... जहाँ एक ओर यह आपके तन की खूबसूरती को उभारकर आपको पुरुषों की नज़रों में चढ़ाता है वहीं अपनी कमजोरियों को ध्यान में न रखकर किया गया प्रदर्शन आपको हँसी का पात्र भी बना सकता है ... इसलिए अपना जिस्म दिखाने से पहले उसकी खूबियों को अच्छी तरह जान लें
अगर आपकी बाहें और टांगें पतली हैं तो भूल कर भी छोटे तंग कपड़े मत पहनिए ... अंग-प्रदर्शन करने की सोचने से पहले अपना वज़न बढ़ाइये ... तब तक सही माप के कपड़े पहनिए ... ना ज्यादा तंग और ना ज्यादा ढीले
(a) बाहें -
ना जाने आपको यह मालूम भी है या नहीं ... आपकी चिकनी बाहें,कलाइयाँ और लम्बी उँगलियाँ देखकर हमारे दिल की धड़कन बढ़ जाती है ... और बगलों की तो पूछिए मत ... मिले तो चाट जाऊँ ... उसे दिखाने का एक तरीका यह है कि स्लीवलेस ड्रेस पहनकर बीच-बीच में अपने हाथों से अपने बाल सँवारिये ... इससे सामने बैठे पुरुष को आपकी बगल की झलक मिलती रहेगी ... बगल की त्वचा चूत की त्वचा के समान ही प्रतीत होती है जिसके दर्शन होते ही उसकी पैंट में खलबली मच जायेगी .
(b) टांगें -
हर पुरूष आपके पैरों के अंगूठों को चूसने ... आपकी चिकनी सुडौल पिंडलियों और मांसल जाँघों को चूमने का ख्वाब देखता है ... पेडिक्योर किये हुए पैर और लाल नेल-पौलिश लगे नाखून देखकर हम अपनी सुध-बुध खो बैठते हैं
चिकनी-चुपड़ी टाँगे...कोई इन्हें चाटे बगैर कैसे रह सकता है...
क्या आप जानती हैं कि अपनी टांगों की नुमाइश कैसे की जाती है ? ऐसी ड्रेस पहनें जो आपके बैठने पर घुटनों से ज़रा ऊपर तक उठ जाए ... जैसे कि केप्री या मिडी . फिर कुर्सी पर एक टांग पर दूसरी टांग चढ़ाकर इस प्रकार बैठिये कि आपकी आगे वाली पिंडली पर पिछले पैर का दबाव पड़े
...अगर आप फर्श पर हों तो इस तरह बैठें कि सामने बैठा पुरूष आपके घुटने और जाँघों से सटी पिंडलियाँ साफ़ देख सके .... उस वक्त पिंडलियों को चबा जाने का मन करता है
उसे ललचाने के लिए कुछ ऐसा पहनिए जो आपकी जाँघों से चिपक जाए ... जैसे कोई प्लेन सलवार .. फिर पहले की ही भांति टांग पर टांग चढ़ाकर बैठिये...कुर्ते के साइड स्लिट में से सलवार में लिपटी आपकी जाँघों की झलक उसे पागल कर देगी
अगर आप थोड़ी और बेशर्म हो सकती हैं तो छोटी स्कर्ट पहनकर टांग पर टांग चढ़ाकर इस प्रकार बैठिये जिससे उसे आपकी जाँघ के बाहरी मांसल भाग का नज़ारा मिल सके ...ठीक उस तरह जैसे फ़िल्म अवार्ड समारोह में अभिनेत्रियाँ बैठती हैं ...पर जैसा मैंने पहले कहा ,अंग-प्रदर्शन तब अधिक प्रभावी होता है जब वह मर्द को और अधिक देखने के लिए बेकरार करे न कि पहले ही सब कुछ दिखा दे
टांगों का पिछला भाग तो बेहद कामोत्तेजक होता है. घुटनों तक की स्कर्ट पहनकर ,नल से पानी पीने या अपने शूलेस बांधने के बहाने ,कमर से झुक जाइए .आपकी सुडौल पिंडलियों और जाँघों के पिछले भाग को देखकर पीछे खड़े युवक का कुछ और भी खड़ा हो जायेगा ...ऐसी सुडौल टांगों को तो नोच कर खा जाने की इच्छा होती है ....पर ध्यान रहे कि कहीं वह चुपके से आकर आपकी स्कर्ट पूरी ऊपर ना उठा दे
अगली बार जब स्कर्ट पहनकर आप सीढ़ियाँ चढ़ें तो पीछे मुड़कर न देखें ..बहुत से युवक आपकी पैंटी का रंग जानने के लिए उत्सुक हैं ...उन्हें भी तो कुछ मज़ा लेने दीजिये ... नीचे से आपकी चिकनी गोरी टांगें संगमरमर के स्तंभों सी प्रतीत होती हैं
शर्मीले स्वभाव की महिलाओं को यह जाल बिछाना चाहिए ...ऐसे कमरे में लेटकर सोने का नाटक कीजिये जहाँ पुरुष का आना-जाना हो ...अपने कपड़ों को अस्त-व्यस्त होने दें ... घुटनों तक उठी साड़ी ,ऊपरी हुक खुला ब्लाउज ....संभावनाएं बहुत हैं ... कोई आश्चर्य की बात नहीं अगर वह दबे पाँव आकर आपको चूम भी ले ... आखिर सुप्त-सौंदर्य को निहारने का मौका रोज़-रोज़ थोड़े ही मिलता है
...सोने का तो सिर्फ बहाना है ... इन्हें तो हमारा लंड खड़ा करवाना है ...
(c) नाभि -
क्या आपने कभी सोचा है कि फ़िल्म अभिनेत्रियाँ अपनी साड़ी नाभि से नीचे ही क्यों बांधती हैं ? .. ज़ाहिर है अब चूत तो दिखा नहीं सकतीं इसलिए उसकी 'छोटी बहन' के दर्शन कराकर ही वाहवाही लूट लेती हैं ... किसी स्त्री की गहरी नाभि देखकर मन में उसे चूमने की तीव्र इच्छा उत्पन्न होती है

....सौभाग्य से आजकल का फैशन महिलाओं को अपनी नाभि का प्रदर्शन करने के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है . ...ऐसा टॉप पहनिए जो सामान्य स्थिति में खड़ी रहने पर तो आपकी नाभि को ढके रहे किंतु जैसे ही आप अपनी बाहें ऊपर करें आपकी नाभि भी बेपर्दा हो जाए...फिर किसी पुरूष की उपस्थिति में अलमारी के ऊपरी शेल्फ से कुछ निकालने का नाटक कीजिये...उसे अपनी आँखों से आपकी नाभि के आसपास की कोमल त्वचा का जी भरकर रसपान करने दीजिये ...अगर वह बिल्कुल पास ही बैठा हो तो उसे ज्यादा मज़ा आएगा ...यह तरकीब पुस्तकालय और बसों में बहुत कारगर सिद्ध होती है ,जहाँ या तो आपको कोई पुस्तक निकालनी पड़ती है या अपना संतुलन बनाये रखने के लिए डन्डा पकड़ना पड़ता है ....ये बात और है कि आपकी इस हरकत के बाद कई ' डंडे ' आपके हाथ में आने को मचल उठते हैं
...कई बार मैंने लड़कियों को अपनी कमर ढकने के लिए टॉप को नीचे खींचते हुए देखा है ...बहुत अजीब लगता है....या तो ऐसे कपड़े पहनिये मत और अगर पहनती हैं तो बिल्कुल बिंदास होकर पहनिये ...पता नहीं आप ऐसा क्यों करती हैं ?...आपको तो अपने गदराये जिस्म पर नाज़ होना चाहिए ...मैं पहले भी कह चुका हूँ कि क्या पता जिसे आप अपनी कमज़ोरी समझती हैं वही आपकी शान हो.

...कभी सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में किसी अपरिचित पुरुष के सामने आकर देखना ... उसके मुँह से कैसे लार टपकती है ...अगर जूते पड़ने का डर ना हो तो ऐसी औरतों को मैं वहीं नंगा करके चोद दूँ .

(d) वक्ष -
यह किसी से छुपा नहीं है कि स्त्री के उन्नत वक्ष पुरुषों का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं .लेकिन शायद आप यह नहीं जानती होंगी कि पूरे मोम्मे देखने से ज्यादा मज़ा उनके बीच की गहरी दरार को देखकर आता है .अगर आप चाहती हैं कि आपके स्तन आकर्षण का केन्द्र बनें तो सही माप की ब्रा पहनें ...बहुत सी महिलाएं ग़लत माप की ब्रा पहनती हैं ...फलस्वरूप उनके स्तन या तो उन तकियों के समान प्रतीत होते हैं जिनमें ज़रूरत से ज़्यादा रुई भर दी गई हो या फ़िर इधर-उधर भागते पानी से भरे गुब्बारों की तरह ... सही साइज़ की ब्रा वह होती है जो आपके स्तनों को सही स्थिति में रखने के साथ-साथ उनके प्राकृतिक उछाल को भी बरकरार रखे
यहाँ वे महिलाएं फायदे में रहती हैं जो अक्सर साड़ी पहनती हैं ...जब चाहा आँचल गिराकर मर्द पर अपना जादू चला दिया....कितनी ही बार यह बिजली मुझपर भी गिरी है ...पर अब भी और देखने की चाहत रहती है....उन कोमल उभारों के बीच की वह गहरी घाटी भुलाये नहीं भूलती

..पर सलवार कमीज़ और टॉप में रहने वाली औरतें भी निराश ना हों .आपकी ब्रा की ही तरह आपका कुर्ता या टॉप ना तो ज्यादा तंग हो ना ज्यादा ढीला ...फिर क्या है...मर्द को पानी देने के बहाने झुक जाइए ... आपके मोम्मों पर नज़र अटकने के बाद बेचारे को पानी की ज्यादा ज़रूरत पड़ेगी ....वैसे सही माप की कमीज़ में बाहर से देखने पर भी आपके बूब्स कुछ कम आकर्षक नहीं लगते...दबाने का मन करता है
'काम' में व्यस्त

अगर आपने टॉप पहना है तो पुरुष के बिल्कुल नज़दीक जाकर खड़े हो जाइए ...खासकर उस वक्त जब वह बैठा हो...इस तरह आपके मोम्मे उसकी आँखों के ठीक सामने होंगे ....फ़िर अपना सिर दूसरी दिशा में घुमाकर कुछ देखने लग जाइये...ऐसा करने से वह आपके मोम्मों को बेझिझक निहार सकेगा...उन रसीले आमों को अपने मुँह में लेने से हम पुरुष अपने आप को कैसे रोकते हैं आप महिलाएं कभी नहीं समझ सकती

क्या आपने कभी सोचा है कि फ़िल्म अभिनेत्रियाँ अपनी साड़ी नाभि से नीचे ही क्यों बांधती हैं ? .. ज़ाहिर है अब चूत तो दिखा नहीं सकतीं इसलिए उसकी 'छोटी बहन' के दर्शन कराकर ही वाहवाही लूट लेती हैं ... किसी स्त्री की गहरी नाभि देखकर मन में उसे चूमने की तीव्र इच्छा उत्पन्न होती है
....सौभाग्य से आजकल का फैशन महिलाओं को अपनी नाभि का प्रदर्शन करने के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है . ...ऐसा टॉप पहनिए जो सामान्य स्थिति में खड़ी रहने पर तो आपकी नाभि को ढके रहे किंतु जैसे ही आप अपनी बाहें ऊपर करें आपकी नाभि भी बेपर्दा हो जाए...फिर किसी पुरूष की उपस्थिति में अलमारी के ऊपरी शेल्फ से कुछ निकालने का नाटक कीजिये...उसे अपनी आँखों से आपकी नाभि के आसपास की कोमल त्वचा का जी भरकर रसपान करने दीजिये ...अगर वह बिल्कुल पास ही बैठा हो तो उसे ज्यादा मज़ा आएगा ...यह तरकीब पुस्तकालय और बसों में बहुत कारगर सिद्ध होती है ,जहाँ या तो आपको कोई पुस्तक निकालनी पड़ती है या अपना संतुलन बनाये रखने के लिए डन्डा पकड़ना पड़ता है ....ये बात और है कि आपकी इस हरकत के बाद कई ' डंडे ' आपके हाथ में आने को मचल उठते हैं
...कई बार मैंने लड़कियों को अपनी कमर ढकने के लिए टॉप को नीचे खींचते हुए देखा है ...बहुत अजीब लगता है....या तो ऐसे कपड़े पहनिये मत और अगर पहनती हैं तो बिल्कुल बिंदास होकर पहनिये ...पता नहीं आप ऐसा क्यों करती हैं ?...आपको तो अपने गदराये जिस्म पर नाज़ होना चाहिए ...मैं पहले भी कह चुका हूँ कि क्या पता जिसे आप अपनी कमज़ोरी समझती हैं वही आपकी शान हो.
...कभी सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में किसी अपरिचित पुरुष के सामने आकर देखना ... उसके मुँह से कैसे लार टपकती है ...अगर जूते पड़ने का डर ना हो तो ऐसी औरतों को मैं वहीं नंगा करके चोद दूँ .
(d) वक्ष -
यह किसी से छुपा नहीं है कि स्त्री के उन्नत वक्ष पुरुषों का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं .लेकिन शायद आप यह नहीं जानती होंगी कि पूरे मोम्मे देखने से ज्यादा मज़ा उनके बीच की गहरी दरार को देखकर आता है .अगर आप चाहती हैं कि आपके स्तन आकर्षण का केन्द्र बनें तो सही माप की ब्रा पहनें ...बहुत सी महिलाएं ग़लत माप की ब्रा पहनती हैं ...फलस्वरूप उनके स्तन या तो उन तकियों के समान प्रतीत होते हैं जिनमें ज़रूरत से ज़्यादा रुई भर दी गई हो या फ़िर इधर-उधर भागते पानी से भरे गुब्बारों की तरह ... सही साइज़ की ब्रा वह होती है जो आपके स्तनों को सही स्थिति में रखने के साथ-साथ उनके प्राकृतिक उछाल को भी बरकरार रखे
यहाँ वे महिलाएं फायदे में रहती हैं जो अक्सर साड़ी पहनती हैं ...जब चाहा आँचल गिराकर मर्द पर अपना जादू चला दिया....कितनी ही बार यह बिजली मुझपर भी गिरी है ...पर अब भी और देखने की चाहत रहती है....उन कोमल उभारों के बीच की वह गहरी घाटी भुलाये नहीं भूलती
..पर सलवार कमीज़ और टॉप में रहने वाली औरतें भी निराश ना हों .आपकी ब्रा की ही तरह आपका कुर्ता या टॉप ना तो ज्यादा तंग हो ना ज्यादा ढीला ...फिर क्या है...मर्द को पानी देने के बहाने झुक जाइए ... आपके मोम्मों पर नज़र अटकने के बाद बेचारे को पानी की ज्यादा ज़रूरत पड़ेगी ....वैसे सही माप की कमीज़ में बाहर से देखने पर भी आपके बूब्स कुछ कम आकर्षक नहीं लगते...दबाने का मन करता है
'काम' में व्यस्त
अगर आपने टॉप पहना है तो पुरुष के बिल्कुल नज़दीक जाकर खड़े हो जाइए ...खासकर उस वक्त जब वह बैठा हो...इस तरह आपके मोम्मे उसकी आँखों के ठीक सामने होंगे ....फ़िर अपना सिर दूसरी दिशा में घुमाकर कुछ देखने लग जाइये...ऐसा करने से वह आपके मोम्मों को बेझिझक निहार सकेगा...उन रसीले आमों को अपने मुँह में लेने से हम पुरुष अपने आप को कैसे रोकते हैं आप महिलाएं कभी नहीं समझ सकती
(e) पीठ -
किसी को यह बताने की ज़रूरत नहीं कि नाभि से नीचे बंधी साड़ी में औरत कितनी मादक लगती है...ऊपर से लो बैक ब्लाउज में से झाँकती आपकी नंगी गठीली पीठ और बलखाती कमर ...कोई कैसे न मर मिटे

(f) नितम्ब -
स्त्री के नितम्ब उसके उरोजों से भी अधिक कामोत्तेजक होते हैं ...कभी ध्यान से देखना कि सामने से गुज़रती किसी गज गामिनी को देखकर मर्दों के सिर कैसे घूमते हैं ...जब औरत अपने कूल्हे मटका-मटकाकर चलती है तो किस आदमी की नीयत ख़राब नहीं होती ?
आपकी चौड़ी तगड़ी गांड मर्दों को बिस्तर पर कुश्ती लड़ने की चुनौती देती है ...मानो कह रही हो कि आओ देखूँ तुममें कितना दम है

...टाइट जींस या सलवार में आपके उभरे हुए नितम्ब देखकर उन्हें तबले की तरह बजाने का दिल करता है

कुछ स्त्रियों की चाल तो इतनी मस्त होती है कि नज़र शिफॉन की साड़ी में लिपटे उनके मांसल नितम्बों पर ही अटककर रह जाती है ...और कुछ देखने का होश ही नहीं रहता... कभी-कभी आपकी पैंट के बाहर से दिखती पैंटी लाइन भी बहुत उत्तेजना पैदा करती है

अब जब अंग-वस्त्रों की बात चल ही पड़ी है तो क्या आपने कभी सोचा है कि स्त्री के अंग-वस्त्रों में इतनी विविधता क्यों उपलब्ध रहती है ?...उन्हें देखकर हमारे मन में कामुकता जो जागती है ... अपने अंग-वस्त्र ऐसे स्थान पर रखिये जहाँ पुरुष की नज़र उनपर पड़ सके ...जैसे स्नानघर ,खुली अलमारी इत्यादि ...बेहतर तो यह होगा कि बड़ी मासूमियत से आप उससे ही धूप में सूख रहे अपने अंग-वस्त्रों को भीतर लाने के लिए कहें ...उसकी तो मानो लॉटरी लग जायेगी...मुझे तो अपने चेहरे पर औरतों की कोमल पैंटी की रगड़ बहुत आनंद देती है

लेकिन अपनी गांड के जलवे दिखाने के लिए सलवार से बढ़कर कुछ नहीं है ..उसका महीन कपड़ा नितम्बों से सट जाने पर देखने वाले को त्वचा का सा आभास देता है ..सलवार कमीज़ पहने कोई महिला जब दुपहिया वाहन के पीछे वाली सीट पर टांग पर टांग चढ़ाकर बैठती है तो उसके कुर्ते की साइड स्लिट में से उसकी जांघ का पिछला भाग साफ़ दिखाई देता है .....उसका तो कुछ नहीं बिगड़ता पर हम जैसे ठरकी टकराते-टकराते बचते हैं

एक आम तरकीब है...पुरूष की ओर पीठ करके अपने पंजों के बल फ़र्श पर बैठ जाइए ....फिर ज़मीन को छू रहे अपने कुर्ते के पिछले भाग को उठाकर पलट दीजिये...कहीं मैला ना हो जाए ...पतली सी सलवार से ढका आपका 'चबूतरा' देखकर अच्छे-अच्छों का ईमान डोल जाता है....

अगर आप पलंग पर उसकी ओर पैर करके लेटी हैं तो अपना एक घुटना मोड़कर दूसरी टांग उसपर चढ़ा लें ... औरतों को इस मुद्रा में देखकर ऐसा लगता है मानो कह रही हों कि आकर मेरी गांड चाटो ना... ओह !

किसी को यह बताने की ज़रूरत नहीं कि नाभि से नीचे बंधी साड़ी में औरत कितनी मादक लगती है...ऊपर से लो बैक ब्लाउज में से झाँकती आपकी नंगी गठीली पीठ और बलखाती कमर ...कोई कैसे न मर मिटे
(f) नितम्ब -
स्त्री के नितम्ब उसके उरोजों से भी अधिक कामोत्तेजक होते हैं ...कभी ध्यान से देखना कि सामने से गुज़रती किसी गज गामिनी को देखकर मर्दों के सिर कैसे घूमते हैं ...जब औरत अपने कूल्हे मटका-मटकाकर चलती है तो किस आदमी की नीयत ख़राब नहीं होती ?
आपकी चौड़ी तगड़ी गांड मर्दों को बिस्तर पर कुश्ती लड़ने की चुनौती देती है ...मानो कह रही हो कि आओ देखूँ तुममें कितना दम है
...टाइट जींस या सलवार में आपके उभरे हुए नितम्ब देखकर उन्हें तबले की तरह बजाने का दिल करता है
कुछ स्त्रियों की चाल तो इतनी मस्त होती है कि नज़र शिफॉन की साड़ी में लिपटे उनके मांसल नितम्बों पर ही अटककर रह जाती है ...और कुछ देखने का होश ही नहीं रहता... कभी-कभी आपकी पैंट के बाहर से दिखती पैंटी लाइन भी बहुत उत्तेजना पैदा करती है
अब जब अंग-वस्त्रों की बात चल ही पड़ी है तो क्या आपने कभी सोचा है कि स्त्री के अंग-वस्त्रों में इतनी विविधता क्यों उपलब्ध रहती है ?...उन्हें देखकर हमारे मन में कामुकता जो जागती है ... अपने अंग-वस्त्र ऐसे स्थान पर रखिये जहाँ पुरुष की नज़र उनपर पड़ सके ...जैसे स्नानघर ,खुली अलमारी इत्यादि ...बेहतर तो यह होगा कि बड़ी मासूमियत से आप उससे ही धूप में सूख रहे अपने अंग-वस्त्रों को भीतर लाने के लिए कहें ...उसकी तो मानो लॉटरी लग जायेगी...मुझे तो अपने चेहरे पर औरतों की कोमल पैंटी की रगड़ बहुत आनंद देती है
लेकिन अपनी गांड के जलवे दिखाने के लिए सलवार से बढ़कर कुछ नहीं है ..उसका महीन कपड़ा नितम्बों से सट जाने पर देखने वाले को त्वचा का सा आभास देता है ..सलवार कमीज़ पहने कोई महिला जब दुपहिया वाहन के पीछे वाली सीट पर टांग पर टांग चढ़ाकर बैठती है तो उसके कुर्ते की साइड स्लिट में से उसकी जांघ का पिछला भाग साफ़ दिखाई देता है .....उसका तो कुछ नहीं बिगड़ता पर हम जैसे ठरकी टकराते-टकराते बचते हैं
एक आम तरकीब है...पुरूष की ओर पीठ करके अपने पंजों के बल फ़र्श पर बैठ जाइए ....फिर ज़मीन को छू रहे अपने कुर्ते के पिछले भाग को उठाकर पलट दीजिये...कहीं मैला ना हो जाए ...पतली सी सलवार से ढका आपका 'चबूतरा' देखकर अच्छे-अच्छों का ईमान डोल जाता है....
अगर आप पलंग पर उसकी ओर पैर करके लेटी हैं तो अपना एक घुटना मोड़कर दूसरी टांग उसपर चढ़ा लें ... औरतों को इस मुद्रा में देखकर ऐसा लगता है मानो कह रही हों कि आकर मेरी गांड चाटो ना... ओह !
(g) चूत -
वैसे तो बिना बिकिनी पहने चूत का उभार दिखाना बहुत मुश्किल है ...पर कुछ स्पोर्ट्स-वीअर और ट्रैक-सूट इतने तंग होते हैं कि हल्का सा उभार तो नज़र आ ही जाता है....जी करता है नन्ही सी चूत को चूम लूँ ...

यदि आप रोमांच का शिखर छूना चाहती हैं तो इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता... कपड़े बदलने या स्नान करने के लिए जानबूझकर ऐसी जगह चुनिए जहाँ कोई पुरुष चोरी-छिपे आपको उस नग्न अवस्था में देख सके... कहना व्यर्थ होगा कि बहुत कम पुरुष ऐसे मौकों को हाथ से जाने देते हैं ... जब आपको इसका यकीन हो जाए कि दरवाज़े या खिड़की के छिद्रों से दो प्यासी आँखें आपको निहार रही हैं तो बेधड़क होकर अपने नंगे शरीर के साथ खेलिए ... आपको ऐसा करते देख उसका क्या हाल होगा आप अंदाजा भी नहीं लगा सकती ... उस दृश्य की कल्पना मात्र से ही मेरा लंड फड़क उठता है
आप सोच रही होंगी कि क्या ऐसा करते आपको शर्म नहीं आएगी ... तो शर्माना कैसा ? वह कैसे जान पायेगा कि आपको पता है वह आपको देख रहा है ... अनजान बनकर आप बेशर्मी का वह नंगा नाच कर सकती हैं जैसा करने का आपने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा
बाहर से इतनी शांत दिखने वाली महिला अन्दर से इतनी गर्म ! ... ऐसी औरत के आगे अश्लील फिल्मों की नायिकाएँ भी ठंडी लगती हैं

विशेष -
शायद यह पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव है जिसने स्त्री सौंदर्य के मापदंड ही बदल दिए हैं...पर चाहे आप प्राचीन यूरोपीय सभ्यताओं को लें या कामसूत्र को ,हर जगह उभारों से परिपूर्ण ,मांसल ,गदराये जिस्म को ही नारी सौंदर्य का पर्याय माना गया है .
KAMASUTRA'S SEXY WOMEN
According to Kamasutra, some of the attributes of sexy women are as follows:
1 Women should have long braided hair so that it will touch their ass cheeks
2 Women wearing sarees should definitely show their round and deep belly buttons
3 Women's tits should be shaped conical and erect resembling gopura kalasams
4 Women's buttocks should be big and round resembling the pot in veena
5 Women should walk sensually like ducks

हो सकता है कि अधिकांश पुरुषों को नारी का गोरा रंग ही भाता हो पर मुझे तो साँवले रंग की स्त्रियाँ अधिक आकर्षक लगती हैं ...शायद ऐसा इसलिए क्योंकि गोरे रंग को अक्सर कोमलता व मासूमियत से जोड़कर देखा जाता है ... पर औरत तो जितनी अश्लील हो उसके साथ उतना ही ज्यादा मज़ा आता है .
एक तो इतना सेक्सी चेहरा ऊपर से यह गदराया जिस्म ...

अधिकतर विवाहित और अधेड़ उम्र की महिलायें इस भावना से ग्रस्त रहती हैं कि अब वह पहले की तरह आकर्षक नहीं रहीं ... अपने पुरुष साथी द्वारा अपनी उपेक्षा से उनकी इस गलत धारणा को बल मिलता है... परन्तु उन्हें यह समझना चाहिए कि समय के साथ किसी व्यक्ति के प्रति यौनाकर्षण में कमी आना स्वाभाविक है.... इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें देखकर पराये मर्दों के लंड भी खड़े नहीं होते... सच तो यह है कि पुरुष के संपर्क में आने के बाद महिलायें और मस्त हो जाती हैं
.... इन्हें देखिये

मैंने बेहद सेक्सी महिलाओं के आत्मविश्वास में सिर्फ इस कारण कमी आते देखी है कि उन्हें अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं होता या फिर उनकी आर्थिक स्थिति कमज़ोर होती है...इतिहास इस बात का साक्षी है कि नारी के यौनाकर्षण के आगे बड़े-बड़े ज्ञानी और धनवान पुरुष भी नतमस्तक हो जाते हैं इसलिए बेझिझक होकर अपने हुस्न के जलवे बिखेरिये....

मुझे यह बात हैरान करती है कि मोटी महिलायें ऐसा क्यों सोचती हैं कि वे सेक्सी नहीं लग सकती ... शायद इसका कारण लोगों के वह ताने हैं जिसके फलस्वरूप उनके आत्मविश्वास में कमी आ जाती है ... पर वह यह भूल जाती हैं कि बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद ?
... ऐसी महिलाओं से मैं पूछना चाहूँगा कि क्या उन्होंने यह महसूस नहीं किया कि उनके मांसल शरीर को देखकर हमारी लार कैसे टपकती है ? ... उन्हें यह अच्छी तरह जान लेना चाहिए कि अगर अपने वजन के कारण उन्हें स्वास्थ्य सम्बंधित कोई शिकायत नहीं है तो उनका मोटापा उनके यौनाकर्षण को बढ़ाता ही है .

अब आप ही बताइए कि क्या छरहरी काया किसी पुरुष के भीतर ऐसी कामाग्नि भड़का सकती है ? .... सवाल ही पैदा नहीं होता ...
इसलिए अपने मोटापे को लेकर कभी हीन-भावना न पालें ... आप क्या समझो कि आपको देखकर हमारा लोड़ा कैसे तन जाता है ...
अपने चेहरे की सुन्दरता को लेकर भी बहुत सी महिलाएं गलतफहमी का शिकार रहती हैं ... उनके लिए यह समझना कठिन है कि एक खूबसूरत चेहरे और एक सेक्सी चेहरे में बहुत फर्क होता है ... खूबसूरत चेहरे पुरुषों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित तो करते हैं पर उनकी यौन-पिपासा को जागृत नहीं कर पाते
क्या इन चेहरों को देखकर आपके मन में कामुक विचार आ रहे हैं ?... नहीं ना

वहीं दूसरी ओर किसी सेक्सी चेहरे को देखकर हमारी पैंट में छुपा 'शैतान' फ़ौरन जाग उठता है ... बहुत से पुरुष मेरी इस बात से सहमत होंगे कि अगर औरत का चेहरा सेक्सी है तो फिर उसकी शारीरिक संरचना भी अधिक मायने नहीं रखती ... मेरा तो यहाँ तक मानना है कि एक सेक्सी चेहरे वाली महिला ही ' चुदक्कड़ ' कहलाने की सही हकदार होती है
... ज़रा इन चेहरों पर नज़र डालिए ... इन्हें कहीं से भी खूबसूरत नहीं कहा जा सकता ... पर क्या ऐसा नहीं लगता कि मानो ये किसी पुरुष की बोटी-बोटी तक नोच डालने को आतुर हों ? चेहरे का यही भाव नारी के यौनाकर्षण को चरमोत्कर्ष प्रदान करता है ... आपने न जाने कितनी बार फिल्म अभिनेत्रियों को अपने चेहरे पर इसी भाव को लाने का प्रयास करते हुए देखा होगा ... पर वे इतना भी नहीं जानती कि सेक्सी चेहरा तो कुदरत की देन होता है ... उसकी नक़ल नहीं की जा सकती

वैसे तो बिना बिकिनी पहने चूत का उभार दिखाना बहुत मुश्किल है ...पर कुछ स्पोर्ट्स-वीअर और ट्रैक-सूट इतने तंग होते हैं कि हल्का सा उभार तो नज़र आ ही जाता है....जी करता है नन्ही सी चूत को चूम लूँ ...
यदि आप रोमांच का शिखर छूना चाहती हैं तो इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता... कपड़े बदलने या स्नान करने के लिए जानबूझकर ऐसी जगह चुनिए जहाँ कोई पुरुष चोरी-छिपे आपको उस नग्न अवस्था में देख सके... कहना व्यर्थ होगा कि बहुत कम पुरुष ऐसे मौकों को हाथ से जाने देते हैं ... जब आपको इसका यकीन हो जाए कि दरवाज़े या खिड़की के छिद्रों से दो प्यासी आँखें आपको निहार रही हैं तो बेधड़क होकर अपने नंगे शरीर के साथ खेलिए ... आपको ऐसा करते देख उसका क्या हाल होगा आप अंदाजा भी नहीं लगा सकती ... उस दृश्य की कल्पना मात्र से ही मेरा लंड फड़क उठता है
आप सोच रही होंगी कि क्या ऐसा करते आपको शर्म नहीं आएगी ... तो शर्माना कैसा ? वह कैसे जान पायेगा कि आपको पता है वह आपको देख रहा है ... अनजान बनकर आप बेशर्मी का वह नंगा नाच कर सकती हैं जैसा करने का आपने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा
बाहर से इतनी शांत दिखने वाली महिला अन्दर से इतनी गर्म ! ... ऐसी औरत के आगे अश्लील फिल्मों की नायिकाएँ भी ठंडी लगती हैं
विशेष -
शायद यह पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव है जिसने स्त्री सौंदर्य के मापदंड ही बदल दिए हैं...पर चाहे आप प्राचीन यूरोपीय सभ्यताओं को लें या कामसूत्र को ,हर जगह उभारों से परिपूर्ण ,मांसल ,गदराये जिस्म को ही नारी सौंदर्य का पर्याय माना गया है .
KAMASUTRA'S SEXY WOMEN
According to Kamasutra, some of the attributes of sexy women are as follows:
1 Women should have long braided hair so that it will touch their ass cheeks
2 Women wearing sarees should definitely show their round and deep belly buttons
3 Women's tits should be shaped conical and erect resembling gopura kalasams
4 Women's buttocks should be big and round resembling the pot in veena
5 Women should walk sensually like ducks
हो सकता है कि अधिकांश पुरुषों को नारी का गोरा रंग ही भाता हो पर मुझे तो साँवले रंग की स्त्रियाँ अधिक आकर्षक लगती हैं ...शायद ऐसा इसलिए क्योंकि गोरे रंग को अक्सर कोमलता व मासूमियत से जोड़कर देखा जाता है ... पर औरत तो जितनी अश्लील हो उसके साथ उतना ही ज्यादा मज़ा आता है .
एक तो इतना सेक्सी चेहरा ऊपर से यह गदराया जिस्म ...
अधिकतर विवाहित और अधेड़ उम्र की महिलायें इस भावना से ग्रस्त रहती हैं कि अब वह पहले की तरह आकर्षक नहीं रहीं ... अपने पुरुष साथी द्वारा अपनी उपेक्षा से उनकी इस गलत धारणा को बल मिलता है... परन्तु उन्हें यह समझना चाहिए कि समय के साथ किसी व्यक्ति के प्रति यौनाकर्षण में कमी आना स्वाभाविक है.... इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें देखकर पराये मर्दों के लंड भी खड़े नहीं होते... सच तो यह है कि पुरुष के संपर्क में आने के बाद महिलायें और मस्त हो जाती हैं
.... इन्हें देखिये
मैंने बेहद सेक्सी महिलाओं के आत्मविश्वास में सिर्फ इस कारण कमी आते देखी है कि उन्हें अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं होता या फिर उनकी आर्थिक स्थिति कमज़ोर होती है...इतिहास इस बात का साक्षी है कि नारी के यौनाकर्षण के आगे बड़े-बड़े ज्ञानी और धनवान पुरुष भी नतमस्तक हो जाते हैं इसलिए बेझिझक होकर अपने हुस्न के जलवे बिखेरिये....
मुझे यह बात हैरान करती है कि मोटी महिलायें ऐसा क्यों सोचती हैं कि वे सेक्सी नहीं लग सकती ... शायद इसका कारण लोगों के वह ताने हैं जिसके फलस्वरूप उनके आत्मविश्वास में कमी आ जाती है ... पर वह यह भूल जाती हैं कि बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद ?
... ऐसी महिलाओं से मैं पूछना चाहूँगा कि क्या उन्होंने यह महसूस नहीं किया कि उनके मांसल शरीर को देखकर हमारी लार कैसे टपकती है ? ... उन्हें यह अच्छी तरह जान लेना चाहिए कि अगर अपने वजन के कारण उन्हें स्वास्थ्य सम्बंधित कोई शिकायत नहीं है तो उनका मोटापा उनके यौनाकर्षण को बढ़ाता ही है .
अब आप ही बताइए कि क्या छरहरी काया किसी पुरुष के भीतर ऐसी कामाग्नि भड़का सकती है ? .... सवाल ही पैदा नहीं होता ...
इसलिए अपने मोटापे को लेकर कभी हीन-भावना न पालें ... आप क्या समझो कि आपको देखकर हमारा लोड़ा कैसे तन जाता है ...
अपने चेहरे की सुन्दरता को लेकर भी बहुत सी महिलाएं गलतफहमी का शिकार रहती हैं ... उनके लिए यह समझना कठिन है कि एक खूबसूरत चेहरे और एक सेक्सी चेहरे में बहुत फर्क होता है ... खूबसूरत चेहरे पुरुषों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित तो करते हैं पर उनकी यौन-पिपासा को जागृत नहीं कर पाते
क्या इन चेहरों को देखकर आपके मन में कामुक विचार आ रहे हैं ?... नहीं ना
वहीं दूसरी ओर किसी सेक्सी चेहरे को देखकर हमारी पैंट में छुपा 'शैतान' फ़ौरन जाग उठता है ... बहुत से पुरुष मेरी इस बात से सहमत होंगे कि अगर औरत का चेहरा सेक्सी है तो फिर उसकी शारीरिक संरचना भी अधिक मायने नहीं रखती ... मेरा तो यहाँ तक मानना है कि एक सेक्सी चेहरे वाली महिला ही ' चुदक्कड़ ' कहलाने की सही हकदार होती है
... ज़रा इन चेहरों पर नज़र डालिए ... इन्हें कहीं से भी खूबसूरत नहीं कहा जा सकता ... पर क्या ऐसा नहीं लगता कि मानो ये किसी पुरुष की बोटी-बोटी तक नोच डालने को आतुर हों ? चेहरे का यही भाव नारी के यौनाकर्षण को चरमोत्कर्ष प्रदान करता है ... आपने न जाने कितनी बार फिल्म अभिनेत्रियों को अपने चेहरे पर इसी भाव को लाने का प्रयास करते हुए देखा होगा ... पर वे इतना भी नहीं जानती कि सेक्सी चेहरा तो कुदरत की देन होता है ... उसकी नक़ल नहीं की जा सकती
अंग-प्रदर्शन का सिद्धान्त -
मनुष्य का यह स्वभाव है कि जो वस्तु आसानी से उपलब्ध हो उसमें उसकी रूचि नहीं रहती... यही कारण है कि हर समय छोटे कपड़ों में रहने वाली युवतियों में पुरुषों की दिलचस्पी शीघ्र ही कम हो जाती है... एक पुरुष को यह बात रोमांचित करती है कि उसे वह देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जिसकी दूसरे मर्द केवल कल्पना ही कर सकते हैं...अंग-प्रदर्शन का अर्थ छोटे कपड़ों में सब कुछ दिखाना नहीं बल्कि पूरे कपड़ों में बहुत कुछ दिखाना है ...और यह कैसे किया जाता है , अब यह आपसे बेहतर कोई नहीं जानता
अंग-प्रदर्शन में मौलिकता की तो बात ही कुछ और होती है ...वह स्वाभाविक लगना चाहिए....पुरुष को इसका तनिक भी एहसास ना हो कि यह सब आप जानबूझकर कर रही हैं ...ऐसा व्यवहार करें मानो आप इस बात से अनभिज्ञ हो कि आपकी हरकतों का उसपर क्या असर हो रहा है..चाहे आप उसे पैंट के बाहर से अपने फड़कते लंड को संभालते ही क्यों ना देख लें ... उसे यह सोचकर परेशान होने दीजिये कि आपके दिमाग में क्या चल रहा है ...उसकी इस उलझन का मज़ा लीजिये
मैं ख़ुद महिलाओं के सामने इस तरह की हरकतें करता रहता हूँ ...उनकी मुस्कान बताती है कि वे भी इसका भरपूर मज़ा लेती हैं
आपकी शरारतें हमेशा पुरुषों का ध्यान आकर्षित करेंगी ...उनकी पारखी नज़रों से कुछ नहीं छुपता...कई बार मर्द का चेहरा देखने से आपको उसकी दशा का पता भी नहीं चलेगा...मगर उसके अंडरवियर में झाँक कर देखिये ...कुश्ती के लिए 'पहलवान' तैयार मिलेगा
... क्या आपको अब भी लगता है कि आपके रूप और यौवन को कोई नहीं निहारता ? ... यही तो वह दृश्य हैं जो मर्दों के होश उड़ा देते हैं...

सार -
मेरा सभी महिलाओं से अनुरोध है कि अंग-प्रदर्शन को नैतिकता का प्रश्न ना बनायें ... दुनिया के ढोंग के पीछे का सच यही है कि स्त्री का यौनाकर्षण (sex appeal) उसके बाकी सारे गुणों पर भारी पड़ता है ...वह औरत ही क्या जिसे देखकर मर्द का खड़ा ना हो
यह देखकर बहुत निराशा होती है कि अधिकतर महिलाओं का सेक्स के प्रति नज़रिया कुछ इस प्रकार का होता है मानो वह पुरुषों से चुदवाकर उनपर बहुत बड़ा एहसान कर रही हों ... अगर फिर भी पुरुष उनके आगे-पीछे घूमते हैं तो सिर्फ विकल्पों के अभाव के कारण ना कि उनकी चाहत के वशीभूत होकर ... क्या आप यही चाहती हैं ? ...मेरा यह मानना है कि आकर्षक शरीर से भी बढ़कर जो चीज़ एक औरत को सेक्सी बनाती है वह है उसका अच्छा स्वास्थ्य और उसकी कामेच्छा ...चुदवाने की प्रबल इच्छा रखने वाली औरतें मर्दों के दिलों पर राज करती हैं ...इसलिए जब भी मौका मिले अपने पुरुष साथी पर भूखी शेरनी की तरह टूट पड़िये
मैंने यह लेख उन औरतों के लिए लिखा है जो जीवन में थोड़ी मस्ती चाहती हैं ...इसमें ऐसा कुछ नहीं है जो आप ना करती हों या फिर ना कर सकें ...आशा करता हूँ कि यह लेख पढ़ने के बाद आप इस कला में निपुण हो गई होंगी...इस प्रकार मर्दों को उकसाने पर लगाम हमेशा आपके हाथ में ही रहेगी ...आप चाहें तो उससे चुदवा सकती हैं या फ़िर सिर्फ़ अंग-प्रदर्शन तक ही सीमित रह सकती हैं ...और हाँ ,इससे आपके चरित्र पर भी आँच नहीं आएगी क्योंकि हम बेचारे पुरुषों को तो पता भी नहीं चलता कि वह महज़ एक इत्तफाक है या कुछ और
... सबसे मज़ेदार बात तो यह है कि आप यह अश्लील हरकतें किसी भी मर्द के साथ कर सकती हैं ...परिचितों से लेकर अपरिचितों तक ...नवयुवकों से लेकर अधेड़ उम्र के पुरुषों तक.....आख़िर लंड सबका खड़ा होता है
ऊपर बताये गए तरीकों के अलावा भी बदन दिखाने के बहुत अवसर हैं ....ज़रूरत है तो बस बेशर्मी के साथ उन मौकों को भुनाने की... अपनी चुदास पड़ोसन को दिखा दीजिये कि इस खेल में आपके सामने वह बच्ची है
जमकर दिखाओ और मज़े लो !
इस लेख में मैंने स्त्री के यौनाकर्षण के शारीरिक पहलू पर ही प्रकाश डाला है पर यहाँ यह बताना भी आवश्यक है कि औरत के नखरे और अदाएँ, उसकी भाव-भंगिमाएँ भी उतनी ही कामोत्तेजक होती हैं...उनके बारे में फिर कभी विस्तार से चर्चा करूँगा.
** मैं चाहता तो इस लेख में शालीन भाषा का प्रयोग भी कर सकता था पर मेरा मानना है कि अश्लीलता के बिना सेक्स अधूरा है.
* टंकण में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा चाहता हूँ .
अशोभनीय -
कई युवतियाँ अपशब्दों का प्रयोग करने में अपनी शान समझती हैं .शायद उन्हें नहीं पता कि 'अश्लील शब्दों' और 'अपशब्दों' में बहुत फर्क होता है .अश्लील शब्द पुरुष को उकसाने व उत्तेजना पैदा करने के लिए प्रयोग किये जाते हैं परन्तु आपके द्वारा कहे गए अपशब्द आपकी मानसिक कुंठा को ही दर्शाते हैं.
उदाहरण के लिए जब आप मर्दों की उपस्थिति में ' चूत, लंड, चोदना ' आदि अश्लील शब्दों का प्रयोग करेंगी तो आपकी बातें सुनकर ही न जाने कितनो का लंड खड़ा हो जायेगा पर यदि आप 'साले बहनचोद' सरीखी गालियाँ देंगी तो स्वयं ही उपहास और घृणा की पात्र बनेंगी .
स्त्री के मुख से अपशब्द शोभा नहीं देते इसलिए अश्लील बनिए किन्तु बदजुबान नहीं.
मेरा यह मानना है कि अगर नाक-कान में ऊँगली डालना और यहाँ- वहां खुजलाने की आदत को छोड़ दिया जाए तो औरतें थोड़ा बदतमीज़ ही अच्छी लगती हैं ...उनका ठहाका लगाकर हँसना....कोहनी मार-मारकर बात करना ....मन तो करता है कि उन्हें गोद में बैठाकर अपने खड़े लंड पर उछालूँ
उनको जीभ चिढ़ाते देखकर तो थूक से सनी उस जीभ को ही चूसने की इच्छा होती है

मैंने अपने लेख में महिलाओं की जिस मस्तानी चाल का उल्लेख किया है,उसी को दर्शाता यह चित्र -

यह चाल 'कैटवाक' से भिन्न है क्योंकि इसमें नितम्ब दायें-बाएं होने की बजाय गोलाई में घूमते हैं...मानो आपको अपनी मालिश करने के लिए उकसा रहे हों
इन मस्त चुदक्कड़ औरतों को कौन मर्द नहीं चोदना चाहेगा ? ....खुले आसमान के नीचे चुदाई का मज़ा ही कुछ और है ... क्या आप में भी है यह हिम्मत ?
मनुष्य का यह स्वभाव है कि जो वस्तु आसानी से उपलब्ध हो उसमें उसकी रूचि नहीं रहती... यही कारण है कि हर समय छोटे कपड़ों में रहने वाली युवतियों में पुरुषों की दिलचस्पी शीघ्र ही कम हो जाती है... एक पुरुष को यह बात रोमांचित करती है कि उसे वह देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जिसकी दूसरे मर्द केवल कल्पना ही कर सकते हैं...अंग-प्रदर्शन का अर्थ छोटे कपड़ों में सब कुछ दिखाना नहीं बल्कि पूरे कपड़ों में बहुत कुछ दिखाना है ...और यह कैसे किया जाता है , अब यह आपसे बेहतर कोई नहीं जानता
अंग-प्रदर्शन में मौलिकता की तो बात ही कुछ और होती है ...वह स्वाभाविक लगना चाहिए....पुरुष को इसका तनिक भी एहसास ना हो कि यह सब आप जानबूझकर कर रही हैं ...ऐसा व्यवहार करें मानो आप इस बात से अनभिज्ञ हो कि आपकी हरकतों का उसपर क्या असर हो रहा है..चाहे आप उसे पैंट के बाहर से अपने फड़कते लंड को संभालते ही क्यों ना देख लें ... उसे यह सोचकर परेशान होने दीजिये कि आपके दिमाग में क्या चल रहा है ...उसकी इस उलझन का मज़ा लीजिये
मैं ख़ुद महिलाओं के सामने इस तरह की हरकतें करता रहता हूँ ...उनकी मुस्कान बताती है कि वे भी इसका भरपूर मज़ा लेती हैं
आपकी शरारतें हमेशा पुरुषों का ध्यान आकर्षित करेंगी ...उनकी पारखी नज़रों से कुछ नहीं छुपता...कई बार मर्द का चेहरा देखने से आपको उसकी दशा का पता भी नहीं चलेगा...मगर उसके अंडरवियर में झाँक कर देखिये ...कुश्ती के लिए 'पहलवान' तैयार मिलेगा
... क्या आपको अब भी लगता है कि आपके रूप और यौवन को कोई नहीं निहारता ? ... यही तो वह दृश्य हैं जो मर्दों के होश उड़ा देते हैं...
सार -
मेरा सभी महिलाओं से अनुरोध है कि अंग-प्रदर्शन को नैतिकता का प्रश्न ना बनायें ... दुनिया के ढोंग के पीछे का सच यही है कि स्त्री का यौनाकर्षण (sex appeal) उसके बाकी सारे गुणों पर भारी पड़ता है ...वह औरत ही क्या जिसे देखकर मर्द का खड़ा ना हो
यह देखकर बहुत निराशा होती है कि अधिकतर महिलाओं का सेक्स के प्रति नज़रिया कुछ इस प्रकार का होता है मानो वह पुरुषों से चुदवाकर उनपर बहुत बड़ा एहसान कर रही हों ... अगर फिर भी पुरुष उनके आगे-पीछे घूमते हैं तो सिर्फ विकल्पों के अभाव के कारण ना कि उनकी चाहत के वशीभूत होकर ... क्या आप यही चाहती हैं ? ...मेरा यह मानना है कि आकर्षक शरीर से भी बढ़कर जो चीज़ एक औरत को सेक्सी बनाती है वह है उसका अच्छा स्वास्थ्य और उसकी कामेच्छा ...चुदवाने की प्रबल इच्छा रखने वाली औरतें मर्दों के दिलों पर राज करती हैं ...इसलिए जब भी मौका मिले अपने पुरुष साथी पर भूखी शेरनी की तरह टूट पड़िये
मैंने यह लेख उन औरतों के लिए लिखा है जो जीवन में थोड़ी मस्ती चाहती हैं ...इसमें ऐसा कुछ नहीं है जो आप ना करती हों या फिर ना कर सकें ...आशा करता हूँ कि यह लेख पढ़ने के बाद आप इस कला में निपुण हो गई होंगी...इस प्रकार मर्दों को उकसाने पर लगाम हमेशा आपके हाथ में ही रहेगी ...आप चाहें तो उससे चुदवा सकती हैं या फ़िर सिर्फ़ अंग-प्रदर्शन तक ही सीमित रह सकती हैं ...और हाँ ,इससे आपके चरित्र पर भी आँच नहीं आएगी क्योंकि हम बेचारे पुरुषों को तो पता भी नहीं चलता कि वह महज़ एक इत्तफाक है या कुछ और
... सबसे मज़ेदार बात तो यह है कि आप यह अश्लील हरकतें किसी भी मर्द के साथ कर सकती हैं ...परिचितों से लेकर अपरिचितों तक ...नवयुवकों से लेकर अधेड़ उम्र के पुरुषों तक.....आख़िर लंड सबका खड़ा होता है
ऊपर बताये गए तरीकों के अलावा भी बदन दिखाने के बहुत अवसर हैं ....ज़रूरत है तो बस बेशर्मी के साथ उन मौकों को भुनाने की... अपनी चुदास पड़ोसन को दिखा दीजिये कि इस खेल में आपके सामने वह बच्ची है
जमकर दिखाओ और मज़े लो !
इस लेख में मैंने स्त्री के यौनाकर्षण के शारीरिक पहलू पर ही प्रकाश डाला है पर यहाँ यह बताना भी आवश्यक है कि औरत के नखरे और अदाएँ, उसकी भाव-भंगिमाएँ भी उतनी ही कामोत्तेजक होती हैं...उनके बारे में फिर कभी विस्तार से चर्चा करूँगा.
** मैं चाहता तो इस लेख में शालीन भाषा का प्रयोग भी कर सकता था पर मेरा मानना है कि अश्लीलता के बिना सेक्स अधूरा है.
* टंकण में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा चाहता हूँ .
अशोभनीय -
कई युवतियाँ अपशब्दों का प्रयोग करने में अपनी शान समझती हैं .शायद उन्हें नहीं पता कि 'अश्लील शब्दों' और 'अपशब्दों' में बहुत फर्क होता है .अश्लील शब्द पुरुष को उकसाने व उत्तेजना पैदा करने के लिए प्रयोग किये जाते हैं परन्तु आपके द्वारा कहे गए अपशब्द आपकी मानसिक कुंठा को ही दर्शाते हैं.
उदाहरण के लिए जब आप मर्दों की उपस्थिति में ' चूत, लंड, चोदना ' आदि अश्लील शब्दों का प्रयोग करेंगी तो आपकी बातें सुनकर ही न जाने कितनो का लंड खड़ा हो जायेगा पर यदि आप 'साले बहनचोद' सरीखी गालियाँ देंगी तो स्वयं ही उपहास और घृणा की पात्र बनेंगी .
स्त्री के मुख से अपशब्द शोभा नहीं देते इसलिए अश्लील बनिए किन्तु बदजुबान नहीं.
मेरा यह मानना है कि अगर नाक-कान में ऊँगली डालना और यहाँ- वहां खुजलाने की आदत को छोड़ दिया जाए तो औरतें थोड़ा बदतमीज़ ही अच्छी लगती हैं ...उनका ठहाका लगाकर हँसना....कोहनी मार-मारकर बात करना ....मन तो करता है कि उन्हें गोद में बैठाकर अपने खड़े लंड पर उछालूँ
उनको जीभ चिढ़ाते देखकर तो थूक से सनी उस जीभ को ही चूसने की इच्छा होती है
मैंने अपने लेख में महिलाओं की जिस मस्तानी चाल का उल्लेख किया है,उसी को दर्शाता यह चित्र -
यह चाल 'कैटवाक' से भिन्न है क्योंकि इसमें नितम्ब दायें-बाएं होने की बजाय गोलाई में घूमते हैं...मानो आपको अपनी मालिश करने के लिए उकसा रहे हों
इन मस्त चुदक्कड़ औरतों को कौन मर्द नहीं चोदना चाहेगा ? ....खुले आसमान के नीचे चुदाई का मज़ा ही कुछ और है ... क्या आप में भी है यह हिम्मत ?
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